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भक्ति और पाठ

स्तोत्र: पाठ और भावार्थ

नौ परिचित स्तुतियों के चुने हुए पद, सरल अर्थ और पारंपरिक पाठ के अवसर। पूरा पाठ हर पृष्ठ पर मूल स्रोत के लिंक से पढ़ें।

01नई शुरुआत में स्मरण

संकटनाशन गणेश स्तोत्र

गणेश जी का स्मरण करके किसी काम की शुरुआत में धैर्य और एकाग्रता का संकल्प।

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02“नमः शिवाय” का भाव

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

शिव के पंचाक्षर मंत्र पर आधारित स्तुति के साथ श्रद्धा और आत्मचिंतन का अभ्यास।

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03कृतज्ञता और समृद्धि का भाव

महालक्ष्मी अष्टकम्

लक्ष्मी जी की स्तुति को जिम्मेदारी, उदारता और कृतज्ञता से जोड़कर पढ़ें।

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04विद्या और विनम्रता

सरस्वती स्तुति

पढ़ाई शुरू करते समय सरस्वती जी के स्मरण और सीखने की नीयत पर एक शांत ठहराव।

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05विष्णु के सहस्र नामों का स्मरण

विष्णु सहस्रनाम

महाभारत से जुड़ी भगवान विष्णु की नाम-स्तुति; अर्थ समझते हुए क्रम से पढ़ने का परिचय।

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06साहस और सेवा का स्मरण

हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास की अवधी रचना से हनुमान जी की भक्ति का परिचय।

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07सूर्य-स्तुति और नया उत्साह

आदित्य हृदयम्

वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में अगस्त्य ऋषि द्वारा श्रीराम को दिया गया सूर्य-स्मरण।

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08देवी-स्मरण और करुणा

दुर्गा सप्तश्लोकी

देवी की सात-पद वाली स्तुति का परिचय और मंगल भावना।

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09दत्त-स्मरण और संरक्षण का भाव

दत्तात्रेय वज्रकवच

दत्तात्रेय परंपरा के विस्तृत कवच-पाठ का सरल परिचय।

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स्तोत्र श्रद्धा और मनन का अभ्यास हैं। उनसे स्वास्थ्य, धन, परीक्षा या जीवन की किसी समस्या का निश्चित परिणाम मिलने का दावा नहीं किया जाता। पाठ-भेद और परिवार की परंपरा का सम्मान करें।