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देवी-स्मरण और करुणा

दुर्गा सप्तश्लोकी

Dharma Daily संपादकीय · 29 सितंबर 2026 · 2 मिनट

देवी की सात-पद वाली स्तुति का परिचय और मंगल भावना।

चुना हुआ पद

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥३॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर

सरल भावार्थ

देवी को मंगलकारी, कल्याणमयी और शरण देने वाली मानकर प्रणाम किया गया है। यह सात श्लोकों में से तीसरा पद है।

किस अवसर पर पढ़ें?

  • दुर्गा पूजा या नवरात्रि में देवी-स्मरण के लिए
  • चिंता के बीच साहस, करुणा और सहारा देने की भावना के लिए

पाठ का तरीका

शांत स्थान पर बैठकर अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ें। उच्चारण सीखने में समय लगे तो धीरे पढ़ें और अर्थ पर ध्यान दें। किसी विशेष संख्या या समय को अनिवार्य मानना जरूरी नहीं।

पाठ-संदर्भ

यह सप्तश्लोकी का चुना हुआ पद है; पूरा सात-श्लोक पाठ स्रोत पर पढ़ें। संपूर्ण मूल पाठ पढ़ें। ऊपर दिया हिंदी भावार्थ Dharma Daily का मौलिक संक्षेप है।

यह पारंपरिक भक्ति के उपयोग का परिचय है, निश्चित फल का वादा नहीं। व्यक्तिगत कठिनाइयों में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी लें।

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