साहस और सेवा का स्मरण
हनुमान चालीसा
गोस्वामी तुलसीदास की अवधी रचना से हनुमान जी की भक्ति का परिचय।
चुना हुआ पद
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर
सरल भावार्थ
आरंभिक दोहे में गुरु चरणों के स्मरण से मन को निर्मल करने और श्रीराम के गुणों का वर्णन करने की भावना है। यह चालीसा का आरंभ है, पूरा पाठ नहीं।
किस अवसर पर पढ़ें?
- हनुमान भक्ति और श्रीराम के प्रति सेवा-भाव याद करने के लिए
- चुनौती के समय साहस, विवेक और अनुशासन का संकल्प लेने के लिए
पाठ का तरीका
शांत स्थान पर बैठकर अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ें। उच्चारण सीखने में समय लगे तो धीरे पढ़ें और अर्थ पर ध्यान दें। किसी विशेष संख्या या समय को अनिवार्य मानना जरूरी नहीं।
पाठ-संदर्भ
मूल रचना अवधी में है; उसका आधुनिक हिंदी अर्थ पाठक की सहायता के लिए दिया गया है। संपूर्ण मूल पाठ पढ़ें। ऊपर दिया हिंदी भावार्थ Dharma Daily का मौलिक संक्षेप है।
यह पारंपरिक भक्ति के उपयोग का परिचय है, निश्चित फल का वादा नहीं। व्यक्तिगत कठिनाइयों में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी लें।