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दत्त-स्मरण और संरक्षण का भाव

दत्तात्रेय वज्रकवच

Dharma Daily संपादकीय · 29 सितंबर 2026 · 2 मिनट

दत्तात्रेय परंपरा के विस्तृत कवच-पाठ का सरल परिचय।

चुना हुआ पद

ॐ दत्तात्रेयः शिरः पातु सहस्राब्जेषु संस्थितः ।
भालं पात्वानसूयेयश्चन्द्रमण्डलमध्यगः ॥२८॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर

सरल भावार्थ

दत्तात्रेय से सिर और ललाट की रक्षा की प्रार्थना की जाती है। कवच की भाषा श्रद्धा और संरक्षण की कामना व्यक्त करती है; इसे वास्तविक सुरक्षा या इलाज का विकल्प न मानें।

किस अवसर पर पढ़ें?

  • दत्त जयंती या अपनी परंपरा की नियमित पूजा में स्मरण के लिए
  • आस्था के साथ जिम्मेदार निर्णय और मानसिक स्थिरता का संकल्प लेने के लिए

पाठ का तरीका

शांत स्थान पर बैठकर अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ें। उच्चारण सीखने में समय लगे तो धीरे पढ़ें और अर्थ पर ध्यान दें। किसी विशेष संख्या या समय को अनिवार्य मानना जरूरी नहीं।

पाठ-संदर्भ

मूल पाठ विस्तृत है और इसमें ध्यान, न्यास तथा फलश्रुति भी हैं। परंपरा के अनुसार विधि जानने के लिए विश्वसनीय शिक्षक से पूछें; इस पृष्ठ पर केवल चुना हुआ पद है। संपूर्ण मूल पाठ पढ़ें। ऊपर दिया हिंदी भावार्थ Dharma Daily का मौलिक संक्षेप है।

यह पारंपरिक भक्ति के उपयोग का परिचय है, निश्चित फल का वादा नहीं। व्यक्तिगत कठिनाइयों में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी लें।

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