विष्णु के सहस्र नामों का स्मरण
विष्णु सहस्रनाम
महाभारत से जुड़ी भगवान विष्णु की नाम-स्तुति; अर्थ समझते हुए क्रम से पढ़ने का परिचय।
चुना हुआ पद
भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः ॥१॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर
सरल भावार्थ
आरंभ में विष्णु को समस्त विश्व से जुड़े, भूत-वर्तमान-भविष्य के अधिष्ठाता और प्राणियों का पालन करने वाले रूप में स्मरण किया जाता है। यह संपूर्ण सहस्रनाम नहीं, मुख्य स्तोत्र का पहला श्लोक है।
पहले पद के कुछ नाम
विश्वम् में समस्त जगत का भाव है। विष्णुः सर्वत्र व्याप्त होने की ओर संकेत करता है। भूतभावनः प्राणियों के पोषण और उन्नति का भाव व्यक्त करता है। पूरे स्तोत्र में एक नाम के अनेक दार्शनिक अर्थ मिलते हैं; अपनी परंपरा का भाष्य पढ़ें।
पूरा सहस्रनाम कैसे पढ़ें?
ऊपर केवल पहला श्लोक है। नीचे दिए स्रोत पर प्रारंभिक संवाद, ध्यान, मुख्य नाम-स्तोत्र और फलश्रुति क्रम से उपलब्ध हैं। लंबे पाठ को जल्दबाजी में पूरा करने की बाध्यता न रखें; अर्थ समझने के लिए प्रतिदिन कुछ पद भी पढ़ सकते हैं।
किस अवसर पर पढ़ें?
- विष्णु भक्ति, नाम-स्मरण और नियमित मनन के लिए
- कठिन समय में धैर्य, कृतज्ञता और धर्मपूर्ण आचरण का संकल्प लेने के लिए
पाठ का तरीका
शांत स्थान पर बैठकर अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ें। उच्चारण सीखने में समय लगे तो धीरे पढ़ें और अर्थ पर ध्यान दें। किसी विशेष संख्या या समय को अनिवार्य मानना जरूरी नहीं।
पाठ-संदर्भ
महाभारत के अनुशासनपर्व में भीष्म और युधिष्ठिर के संवाद से यह परंपरा जुड़ी है। पाठ लंबा है; समय कम हो तो इसका कुछ अंश पढ़ें या पूरा पाठ स्रोत पर देखें। अलग संस्करणों में आरंभिक ध्यान, न्यास और श्लोक-क्रम बदल सकते हैं। संपूर्ण मूल पाठ पढ़ें। ऊपर दिया हिंदी भावार्थ Dharma Daily का मौलिक संक्षेप है।
यह पारंपरिक भक्ति के उपयोग का परिचय है, निश्चित फल का वादा नहीं। व्यक्तिगत कठिनाइयों में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी लें।