कृतज्ञता और समृद्धि का भाव
महालक्ष्मी अष्टकम्
लक्ष्मी जी की स्तुति को जिम्मेदारी, उदारता और कृतज्ञता से जोड़कर पढ़ें।
चुना हुआ पद
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥१॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥१॥पाठ का अंश · संपूर्ण पाठ नीचे दिए स्रोत पर
सरल भावार्थ
महालक्ष्मी को प्रणाम है; आरंभिक पद में उनके दिव्य स्वरूप और शंख, चक्र तथा गदा का उल्लेख है।
किस अवसर पर पढ़ें?
- लक्ष्मी पूजा और घर में कृतज्ञता के भाव के लिए
- संसाधनों का सोच समझकर उपयोग और साझा करने का संकल्प लेने के लिए
पाठ का तरीका
शांत स्थान पर बैठकर अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ें। उच्चारण सीखने में समय लगे तो धीरे पढ़ें और अर्थ पर ध्यान दें। किसी विशेष संख्या या समय को अनिवार्य मानना जरूरी नहीं।
पाठ-संदर्भ
स्तुति में व्यक्त समृद्धि की कामना को निश्चित धन लाभ का वादा न समझें। संपूर्ण मूल पाठ पढ़ें। ऊपर दिया हिंदी भावार्थ Dharma Daily का मौलिक संक्षेप है।
यह पारंपरिक भक्ति के उपयोग का परिचय है, निश्चित फल का वादा नहीं। व्यक्तिगत कठिनाइयों में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी लें।